ब्लॉगः आज नफरत के बीच सच्ची शांति दे सकता है गौतम बुद्ध का संदेश ‘अप्प दीपो भव’

जब भी गौतम बुद्ध का नाम मेरे मस्तिष्क में आता है, उनकी एक कहानी याद आ जाती है। किस्सा कुछ यूं है, 'एक बार वे अपने शिष्यों से संवाद कर रहे थे, तभी गुस्से से भरा एक व्यक्ति आया और जोर-जोर से उन्हें अपशब्द कहने लगा। महात्मा बेहद शांत भाव से मुस्कुराते हुए सुनते रहे। बुद्ध तब तक उसे सुनते रहे जब तक वह थक नहीं गया। शिष्य क्रोध से भरे जा रहे थे। वह व्यक्ति भी आश्चर्यचकित था, हारकर उसने बुद्ध से पूछा, 'आप मेरे कटु वचनों का उत्तर क्यों नहीं देते?' बुद्ध ने उसी शांत भाव से कहा, 'यदि तुम मुझे कुछ देना चाहो और मैं नहीं लूं तो वह सामान किसके पास रह जाएगा?' व्यक्ति ने कहा, 'निश्चय ही वह मेरे पास रह जाएगा।' बुद्ध ने कहा, 'आपके अपशब्द किसके पास रह गए?' व्यक्ति गौतम के पैरों पर गिर पड़ा।' यही बुद्ध की ताकत थी। यही बुद्धत्व का सार है। क्षमा, संयम, त्याग। मुझे लगता है, इन्हीं बातों की आज सबसे ज्यादा जरूरत है।

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