बस्तर में क्यों कम हुआ माओवादियों का असर? जानें कोरोना के बाद कैसे बदल गए हालात
बस्तर के स्थानीय अखबारों में प्रायः रोज ही दस-पंद्रह माओवादियों के पुलिस के सामने सरेंडर करने और दो-तीन के उस पर हमला करने की कोशिश में मारे जाने की खबरें होती हैं। बस्तर में कई इलाके ऐसे हैं, जहां सरकारी मशीनरी की पैठ लंबे अर्से से ना के बराबर है। ऐसे ही कुछ गांवों में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी गैर-सरकारी पहलकदमियों को यूनिसेफ अपना समर्थन दे रहा है।
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