ब्लू टिक के लिए वसूली, फिर 'ऑपरेशन क्लीन'... आखिर ट्विटर से एलन मस्क क्या हासिल करना चाहते हैं?
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क (Elon Musk) ने ट्विटर (Twitter) का मालिक बनते ही कंपनी को अपने हिसाब से चलाना शुरू कर दिया है। मस्क ने पिछले हफ्ते ट्विटर को खरीदने की डील पूरी और इसके साथ ही एक्शन में आ गए। वह एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसले करने में लगे हैं। पहले उन्होंने कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) और दूसरे टॉप अधिकारियों को बाहर किया। फिर ब्लू टिक के लिए यूजर्स से हर महीने आठ डॉलर मांगे और अब बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छुट्टी कर दी। भारत में तो उन्होंने लगभग पूरी टीम को ही साफ कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर मस्क ट्विटर के जरिए क्या हासिल करना चाहते हैं? मस्क ने कहा है कि ट्विटर के यूजर्स अगर ब्लू टिक के रूप में प्रामाणिकता का ठप्पा चाहते हैं तो उन्हें हर महीने 8 डॉलर का शुल्क देना होगा। अब तक इसके लिए कोई पैसे नहीं लिए जाते थे। इसका खुला विरोध हो रहा है लेकिन का साफ कहना है कि शिकायत करने वाले करते रहें, पर चार्ज तो देना ही होगा। इस बीच ट्विटर ने बड़े पैमाने पर छंटनी कर दी है। अभी कंपनी में करीब 7,500 लोग काम करते हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या आधी रह जाएगी। जो बचे रहेंगे उन्हें अपनी नौकरी बचाने के लिए रोज 12 घंटे और सातों दिन काम करना होगा। क्यों गिरी कंपनी की इनकम मस्क ने कंपनी की इनकम में कमी के लिए ‘एक्टिविस्ट्स’ को जिम्मेदार ठहराया है। कंपनी पर बड़े पैमाने पर छंटनी के बाद उन्होंने ट्वीट किया, ‘एक्टिविस्ट ग्रुप्स ने एडवरटाइजर्स पर भारी दबाव बनाया, जिससे ट्विटर की इनकम में भारी कमी आई। यहां तक कि कंटेंट की निगरानी से भी कुछ नहीं बदला। हमने एक्टिविस्ट को खुश करने के लिए सबकुछ किया। वे अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं।’ इससे साफ है कि मस्क ट्विटर में किसी तरह का एक्टिविज्म नहीं चाहते हैं बल्कि इसे एक प्राइवेट कंपनी की तरह मुनाफे में लाना चाहते हैं। टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ ने ट्विटर को 44 अरब डॉलर में खरीदा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतनी महंगी डील करके मस्क ने बड़ा जोखिम मोल लिया है। जाहिर है मस्क पर इस सौदे को कामयाब बनाने का दबाव है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि वह तीन साल के अंदर ट्विटर को मुनाफे में ले आएंगे। यही वजह है कि ट्विटर को पटरी पर लाने के लिए मस्क ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। एडवरटाइजर्स पर डोरे मस्क ने तीन साल पहले कहा था कि वह एडवरटाइजर्स से नफरत करते हैं। समय का चक्र देखिए कि आज उन्हें ट्विटर के एडवरटाइजर्स को रोकने के लिए उन पर डोरे डालने पड़ रहे हैं। मस्क के ट्विटर का मालिक बनते ही एडवरटाइजर्स ने इस सोशल मीडिया कंपनी से किनारा करना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत अमेरिका की दिग्गज ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स (General Motors) ने की। अमेरिका की इस सबसे बड़ी ऑटो कंपनी ने ट्विटर पर एडवरटाइजिंग रोक ली है। कंपनी का कहना है कि वह अभी यह समझने में लगी है कि नए मालिक के आने के बाद कंपनी के आगे की दिशा क्या होगी। कंपनियों में भ्रम की स्थिति ट्विटर की कमान संभालते ही मस्क ने कंपनियों को लिखे एक पत्र में कहा कि वह ट्विटर को दुनिया का सबसे सम्मानित एडवरटाइजिंग प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'इससे आपका ब्रांड मजबूत होगा। आइए मिलकर कुछ असाधारण काम करते हैं।' मस्क का दावा है कि उन्होंने ट्विटर को इसलिए खरीदा क्योंकि मानव सभ्यता के भविष्य के लिए एक कॉमन डिजिटल टाउन स्क्वायर होना जरूरी है। उन्हें आशंका थी कि सोशल मीडिया नफरत फैला रहा है और समाज को बांट रहा है। मस्क के इन्हीं विचारों से एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में भ्रम की स्थिति है कि वह फ्री-स्पीच के हिमायती हैं या चतुर बिजनसमैन। ट्विटर के कुल रेवेन्यू में एडवरटाइजिंग का हिस्सा 90 फीसदी है। पहली छमाही में यह 2.18 अरब डॉलर रहा। ट्विटर पर पांच सबसे बड़े एडवरटाइजर्स HBO, Mondelez, Amazon, IBM और PepsiCo रहे। एडवरटाइजिंग एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म Pathmatics के मुताबिक उन्होंने इस हफ्ते ट्विटर पर एडवरटाइजिंग पर 15.5 करोड़ डॉलर से अधिक खर्च किए। एचबीओ ने एक बयान में कहा कि वह नई लीडरशिप के तहत प्लेटफॉर्म का आकलन करेगी और फिर आगे उचित फैसला करेगी। जानकारों का कहना है कि अगर एडवरटाइजर्स कंपनी से दूर होते हैं तो यह कंपनी के लिए अच्छा नहीं होगा। यानी मस्क निवेशकों और एडवरटाइजर्स को खुश करने के लिए ट्विटर में ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं।
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