अब अरुणाचल से सिक्किम तक एलएसी के निकट जा पाएंगे टूरिस्ट, सेना एडवेंचर टूरिज्म को दे रही है बढ़ावा
नई दिल्ली: भारत लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी के पास टूरिस्टों की मौजूदगी को बढ़ा रहा है, जिससे उन सब जगहों पर भारत का दावा और पुख्ता हो सके। साथ ही ऐसी जगहों पर टूरिस्ट की आवाजाही से चीन के दावे की हवा भी निकलेगी। अरुणाचल प्रदेश से लेकर सिक्किम तक और काराकोरम पास तक अलग-अलग एडवेंचर अभियान करवा रही है। ये सिलसिला कुछ साल पहले शुरू हुआ और अब इसमें तेजी आई है।
एलएसी के करीब 11 पॉइंट चुने गए
कुछ दिन पहले ही सिक्किम से लेकर अरुणाचल के पूर्वी छोर तक सेना ने अभियान पूरा किया। इसमें सेना के साथ सिविलियंस भी इन जगहों तक यानी एलएसी के काफी करीब तक पहुंचे। तीन महीनों तक 6 पर्वतारोहण अभियान, 16,500 फीट की ऊंचाई पर करीब 700 किलोमीटर के 7 ट्रैकिंग अभियान , 6 घाटियों में 1,000 किलोमीटर से ज्यादा 6 साइकलिंग अभियान और 3 नदियों में 132 किलोमीटर के 3 वाइट वॉटर राफ्टिंग अभियान आयोजित किए गए। इसके लिए भारतीय सेना ने एलएसी के करीब के 11 पॉइंट को चुना। इसमें सिक्किम में भारत नेपाल तिब्बत ट्राई जंक्शन स्थित माउंट जोंसोंग का शिखर भी शामिल था।रिस्ट्रिक्टेड एरिया आम जनता के लिए खोले
2018 में गृह मंत्रालय ने लद्दाख में 5 नए रूट को टूरिस्ट और 4 ट्रेल ट्रैकिंग के लिए खोला था। इसके अगले साल रक्षा मंत्रालय ने दुनिया के सबसे ऊंचे बैटल फील्ड सियाचिन को टूरिस्टों के लिए खोल दिया। इससे पहले भारतीय सेना के अलावा यहां कोई नहीं जा सकता था। टूरिस्ट अब बेस कैंप से कुमार पोस्ट तक जा सकते हैं। 2019 में ही करगिल विजय दिवस की 20वीं सालगिरह मनाने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय सेना का सिविलियंस के साथ मिलकर बाइक अभियान काराकोरम के पास गया जो 18,600 फीट की ऊंचाई पर है और यहां तीन देशों के बॉर्डर मिलते हैं। सामरिक दृष्टि से भी यह पास भारतीय सेना के लिए बेहद अहम है। तब तक इस पास तक तो क्या इससे 25 किलोमीटर पहले डीबीओ तक भी कोई सिविलियन नहीं पहुंचा था क्योंकि यह रिस्ट्रिक्टेड एरिया है।from https://ift.tt/8Uy4ux0
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